Dil dhoondta hai phir wahi ...

                  मौसम 
(Inspired by love and Gulzar sahab ) 

बरसात की हरियाली राहों में 
गुलमोहरि कलियाँ सजी हुई, 
साथ में , हाथों में हाथ लिए 
लम्बी सड़कों पे चल पड़ें 
रास्ते और मंज़िलें, तुझ में ही मिले हुए 
दिल ढूँडता है फिर वही , फ़ुरसत के रात दिन 
 
बारिश की हल्की फुहार में 
मिट्टी की ख़ुशबू ओडे हुए 
हथेली पे कुछ, लिखके तुमने 
आँखों से बात की
धड़कनों को फिर से सुने
हसरतों की बरसात में 
दिल ढूँडता है फिर वही, फ़ुरसत के रात दिन ... 

पतझड़ की तेज़ हवाएँ जो 
उमीदें तोड़ दें
सहमी सी ये काया मेरी 
जीना भी छोड़ दे 
रूह को यूँ सींचना 
जो तुमसे मुझे जोड़ दे 
दिल ढूँडता है फिर वही 
रूहानियत के रात दिन ......

https://youtu.be/g-XkQ2QcBSs

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